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IPL 2026: ऋषभ पंत की कप्तानी में LSG का निराशाजनक प्रदर्शन, प्लेऑफ से बाहर

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आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जाएंट्स का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और टीम प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई। ऋषभ पंत की कप्तानी में टीम 10वें स्थान पर रही। जानिए हार के 5 बड़े कारण।

आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जाएंट्स का प्रदर्शन एक बार फिर निराशाजनक रहा और टीम लगातार तीसरे सीजन में प्लेऑफ में जगह बनाने में नाकाम रही। ऋषभ पंत की कप्तानी में उतरी यह टीम पूरे सीजन में संघर्ष करती नजर आई और अंततः अंक तालिका में 10वें स्थान पर रहकर टूर्नामेंट से बाहर होने वाली पहली टीम बन गई। 2022 से आईपीएल का हिस्सा बनी लखनऊ टीम अब तक एक भी बार फाइनल तक नहीं पहुंच सकी है, जिससे टीम मैनेजमेंट और फैंस की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

मेगा नीलामी में बड़े बदलावों और स्टार खिलाड़ियों को जोड़ने के बावजूद टीम का प्रदर्शन सुधार नहीं पाया। ऋषभ पंत को रिकॉर्ड कीमत पर खरीदकर कप्तानी सौंपी गई थी, लेकिन उनके नेतृत्व में भी टीम स्थिरता नहीं दिखा सकी। पूरे सीजन में बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी तक, लखनऊ टीम कई मौकों पर लड़खड़ाती नजर आई।

1. टॉप ऑर्डर का लगातार फेल होना

लखनऊ सुपर जाएंट्स की सबसे बड़ी कमजोरी इस सीजन उनका टॉप ऑर्डर रहा। एडेन मार्करम और निकोलस पूरन जैसे अनुभवी बल्लेबाजों से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन दोनों खिलाड़ी लगातार रन बनाने में असफल रहे।

मार्करम ने 11 मैचों में 231 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 138 के आसपास रहा, जो टीम की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त नहीं था। वहीं निकोलस पूरन का प्रदर्शन और भी खराब रहा, जिन्होंने 11 मैचों में केवल 184 रन बनाए। पावरप्ले में तेज शुरुआत देने के बजाय टीम बार-बार शुरुआती विकेट खोती रही, जिससे दबाव पूरी टीम पर आ गया।

2. ऋषभ पंत की कप्तानी और फॉर्म दोनों सवालों में

ऋषभ पंत से इस सीजन टीम को नई दिशा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उनका व्यक्तिगत प्रदर्शन भी औसत रहा। 11 मैचों में उन्होंने 251 रन बनाए और केवल एक अर्धशतक लगाया।

कई अहम मौकों पर पंत न तो बड़ी पारी खेल पाए और न ही टीम को संकट से निकाल सके। कप्तानी में भी उनकी रणनीति पर सवाल उठे, खासकर गेंदबाजी बदलाव और फील्डिंग सेटिंग को लेकर। दबाव वाले मैचों में टीम अक्सर गलत फैसलों की शिकार दिखी।

3. मध्यक्रम पूरी तरह असफल साबित हुआ

लखनऊ का मध्यक्रम इस सीजन लगभग पूरी तरह निष्क्रिय नजर आया। आयुष बदोनी, हिम्मत सिंह और अब्दुल समद जैसे खिलाड़ियों से उम्मीद थी कि वे टीम को स्थिरता देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

टॉप ऑर्डर के फेल होने के बाद मध्यक्रम जिम्मेदारी उठाने में पूरी तरह नाकाम रहा। न तो कोई बड़ी साझेदारी बन सकी और न ही टीम मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकल पाई। यही कारण रहा कि कई मैचों में लखनऊ बड़े स्कोर तक भी नहीं पहुंच सका या लक्ष्य का पीछा करते हुए बिखर गया।

4. स्पिन विभाग में दिग्वेश राठी का गिरता प्रदर्शन

पिछले सीजन शानदार प्रदर्शन करने वाले दिग्वेश राठी इस बार पूरी तरह फ्लॉप साबित हुए। उनसे काफी उम्मीदें थीं कि वह बीच के ओवरों में विकेट निकालकर मैच का रुख बदलेंगे, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सके।

इस सीजन उन्होंने 8 मैचों में केवल 5 विकेट लिए और उनका इकोनॉमी रेट 10 के आसपास रहा, जो काफी महंगा साबित हुआ। कई मैचों में विपक्षी बल्लेबाजों ने उन्हें आसानी से खेला, जिससे टीम को बड़ा नुकसान हुआ। एक भरोसेमंद स्पिन विकल्प की कमी साफ नजर आई।

5. गेंदबाजी में निरंतरता की कमी

लखनऊ सुपर जाएंट्स की गेंदबाजी इकाई पूरे सीजन में अस्थिर रही। मोहम्मद शमी ने कुछ मैचों में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन लगातार लय बनाए रखने में असफल रहे।

प्रिंस यादव ने जरूर कुछ मैचों में अच्छी गेंदबाजी की और एक छोर से दबाव बनाए रखा, लेकिन दूसरे छोर से समर्थन नहीं मिला। बाकी गेंदबाज अक्सर महंगे साबित हुए और डेथ ओवर्स में टीम को ज्यादा रन खर्च करने पड़े। इसी असंतुलन ने कई करीबी मैच लखनऊ के हाथ से निकाल दिए।

सीजन का निचोड़ और आगे की चुनौती

पूरे सीजन को देखें तो लखनऊ सुपर जाएंट्स की सबसे बड़ी समस्या टीम संतुलन की कमी रही। स्टार खिलाड़ियों के बावजूद प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखी। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में तालमेल की कमी साफ नजर आई।

ऋषभ पंत की कप्तानी में यह उम्मीद थी कि टीम नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी, लेकिन नतीजा इसके उलट रहा। अब टीम मैनेजमेंट के सामने बड़ा सवाल यह है कि अगले सीजन के लिए किस तरह मजबूत संयोजन तैयार किया जाए, ताकि लगातार असफलता के इस दौर को खत्म किया जा सके।

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